विज्ञान और प्रौद्योगिकी से आत्मनिर्भर भारत
आत्मनिर्भरता एक व्यापक संकल्पना है जिसमें स्वाभिमान और स्वावलंबन जैसे दो अहम पहलू समाहित होते हैं। आत्मनिर्भरता एक व्यक्ति से आरंभ होते हुए, परिवार, समाज और राष्ट्र पर आकर पूरी होती है। इसे प्राय: आर्थिक मजबूती से जोड़कर देखा जाता है। मगर इसमें नागरिक संप्रभुता, सामाजिक समरसता, विज्ञान, तकनीक, नवाचार, परस्पर विश्वास जैसे अंगों का महत्व कतई कम नहीं होता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर प्रोफेसर आशुतोष शर्मा की राय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) में सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने यह देखने के लिए कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी कैसे आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जा सकती है, ज्ञान श्रृंखला की जांच करने और उसे शुरू से अंत तक मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्थान सरकार की पहल पर 30 मई 2020 को आयोजित राजस्थान स्ट्राइड वर्चुअल सम्मेलन में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा, ''चूंकि आत्मनिर्भर भारत या आत्मनिर्भरता का आह्वान किया गया है, इसलिए वैश्विक गुणवत्ता के साथ इसका जवाब दिया जाना चाहिए। आत्मनिर्भर बनने के लिए, हमें भारत की ताकत को...